छोटी आँखों में बड़े सपने
जैसे पैर सिकोडे बैठे हैं।
लद्पद से
गिरते पड़ते सपने
दूसरे सपनो को नीचे कुचलते सपने
हालात को जीते मरते सपने
एक दूजे को ठेलते सपने
दौड़ते चढ़ते उतरते सपने
सपनो के नीचे दबकर दम तोड़ते सपने
सपनो की भीड़ में गुम होते सपने।
सपने देखना बुरा नहीं।
सच्चाई की ऊबड़ खाबड़ सड़क के दचके खाकर
बुरा है सपनो के टूटने से डरना,
सपने देखना band करना
जो सपने नहीं देखते
कैसे जीते हैं?
वे जीते नहीं; जीवन kaat देते हैं ro rokar
हम सपने देखते hain
और उन्हीं सपनो में नए सपने bunte hain.
Tuesday, June 10, 2008
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